फरक्का बैराज कोलकाता बंदरगाह को बचाने के लिए बना था. 1996 में भारत-बांग्लादेश ने इसके पानी के बंटवारे का सिस्टम तय किया. अब बिहार कह रहा है कि इस व्यवस्था की कीमत वह बाढ़ और गाद के रूप में चुका रहा है. बंगाल अपनी नदी-बंदरगाह की जरूरतों को लेकर चिंतित है और बांग्लादेश सूखे मौसम में अपने हिस्से के पानी की गारंटी चाहता है.